यह कैसे काम करता है
आपकी कुंडली पर छह हज़ार से ज़्यादा शास्त्र-नियम लगाए जाते हैं।
हर नियम किसी पुराने ग्रंथ से आया है। हर नियम को ज्योतिष के अनुभवी पंडितों ने पढ़कर जाँचा है। और हर वाक्य के नीचे लिखा है कि वह किस नियम से निकला — आप ख़ुद देख सकते हैं।
जन्म की तारीख़, समय और जगह — बस इतना चाहिए। उसके बाद:
- पूरी कुंडली — नवग्रह, लग्न, बारह भाव, और सोलह वर्ग-कुंडलियाँ
- छह बातों पर पढ़िए कि आपकी कुंडली क्या कहती है — शादी-ब्याह और साथी, काम-धंधा, पैसा, सेहत, बच्चे, घर-परिवार
- कौन सा समय कैसा — विंशोत्तरी और योगिनी दशा, प्राण दशा तक
- आज का दिन — आपकी अपनी राशि पर आज के ग्रहों का असर, रोज़ सुबह नया
- साढ़े साती और ग्रहों का बल — अष्टकवर्ग, षड्बल, और जो योग बनते हैं
- अपने सवाल — जो पूछना हो, अपनी ही कुंडली के हिसाब से जवाब
आपकी कुंडली एक बार बनती है और वही सुरक्षित रहती है। आज का फल हो, किसी बात पर पढ़ना हो, या आपके सवाल का जवाब — सब उसी एक गणना से निकलते हैं।
इसलिए आज जो पढ़ा और कल जो पढ़ेंगे, उनमें टकराव नहीं होगा। ज्योतिषी बदलने पर जवाब बदल जाना — यहाँ वह नहीं होता।
हर वाक्य किसी शास्त्र के वचन से आता है — बृहज्जातक, मानसागरी, और उन्हीं जैसे मान्य ग्रंथों से। हमने उन्हें पढ़ा, आज की सीधी हिंदी में लिखा, और मूल पाठ साथ रखा।
दो अनुभवी पंडित हर वचन को मूल के सामने रखकर देखते हैं। जो ठीक है वही रहता है।
किसी वाक्य के नीचे ⓘ दबाइए — वह वचन, उसका ग्रंथ, और आपकी कुंडली की वह बात जिससे वह लगा, तीनों दिख जाएँगे।
- मृत्यु या आयु पर कुछ नहीं — न पूछने पर, न इशारे में।
- डर नहीं बेचते — शास्त्र की कठोर भाषा को सावधानी की भाषा में लिखा जाता है। जो बात चिंता की है, वह साफ़ लिखी जाती है; डराकर नहीं।
- तारीख़ नहीं बताते — ‘फ़लाँ दिन यह होगा’ हम नहीं लिखते। समय का रुझान बताते हैं, घटना की तारीख़ नहीं।
- सेहत में आख़िरी राय डॉक्टर की — हर बार, बिना भूले।
- हम अपनी तरफ़ से कुछ नहीं जोड़ते — जो नियम में है वही; न कम, न ज़्यादा।
आपकी जन्म-जानकारी आपके फ़ोन में रहती है जब तक आप खाता न बनाएँ। खाता बनाने पर वह खाते से जुड़ती है, और हटाने पर पहचान, बातचीत और खाता मिट जाते हैं। यह सब निजता-नीति में लिखा है।
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