एक बड़े देश का राजा था। उसके देश में एक गरीब आदमी रहता था, जो हमेशा राजा से हाथ मिलाने की इच्छा रखता था। जब भी वह किसी बड़े आदमी को राजा से हाथ मिलाते देखता, उसके मन में भी यह तमन्ना जाग उठती। धीरे-धीरे यह तमन्ना बढ़ती गई और उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह राजा से हाथ मिलाकर रहेगा।
एक दिन वह आदमी किसी संत के पास गया और अपनी इच्छा बताई। संत ने कहा कि इसके लिए तुझे सब्र और मेहनत करनी पड़ेगी, क्रोध और लालच का त्याग करना पड़ेगा और समय भी लगेगा। आदमी ने यह सब करने के लिए तैयार हो गया। संत ने उसे सलाह दी कि राजा एक महल तैयार करवा रहा है, वह वहां जाकर बिना किसी लालच के भेदभाव के ईमानदारी से काम करे।
वह आदमी महल में काम करने लगा। जब भी शाम को राजा का मंत्री मजदूरी देता, वह कह देता कि यह अपना ही काम है, अपने काम की मजदूरी कैसी। वह दिन-रात मेहनत करता और खाली नहीं बैठता। समय बीतता गया और महल तैयार हो गया। उसने महल के चारों ओर सुंदर-सुंदर फूल और पेड़ लगाकर उसे इतना खूबसूरत बना दिया कि जो भी देखता, देखता ही रह जाता।
एक दिन राजा महल देखने आया और उसे देखकर बहुत खुश हुआ। उसने मंत्री से पूछा कि इतनी सजावट किसने की है। मंत्री ने बताया कि यह कोई आपका ही रिश्तेदार है, जिसने 12 साल से मजदूरी नहीं ली और अन्य मजदूरों से अधिक काम किया है। जब भी मजदूरी देने की बात होती, वह कहता कि अपना ही काम है, अपने काम की मजदूरी कैसी।
राजा सोच में पड़ गया कि ऐसा कौन सा रिश्तेदार है। उसने कहा कि उसे बुलाओ। आदमी को बुलाया गया और राजा ने उसका खड़े होकर स्वागत किया और हाथ मिलाया। फिर राजा ने उससे उसका परिचय लिया। परिचय के बाद राजा को हैरानी हुई कि यह रिश्तेदार भी नहीं है और मजदूरी भी नहीं ली है, और सेवाभाव से काम भी किया है। राजा बहुत खुश हुआ और कहा कि मांगो क्या मांगते हो। आदमी ने कहा कि जी, कुछ नहीं, जो चाहता था, वह मिल गया। उसने सारी बात बताई।
राजा ने कहा कि अब तेरा मुझसे हाथ मिल गया है, अब तू बेपरवाह है, सब सुख तेरे अधीन है, अब तू भी बादशाह है। जो कुछ मेरा है, वह तेरा है।
इस कहानी का मतलब है कि हमें उस मालिक बादशाह की भक्ति जी जान से, दिल लगाकर पूरी ईमानदारी से करनी चाहिए। जब उससे अपना हाथ मिल जाएगा, तो कोई कमी नहीं रहेगी। अगर एक दुनिया का राजा खुश होकर इतना कुछ दे सकता है, तो खुद परमात्मा से हाथ मिलाने पर क्या कमी होगी।
अपने सतगुरु को खुश करो, चाहे जैसे भी करो। यही सच्ची भक्ति है। उससे हाथ मिलाकर उसके जैसे हो जाओ, वह बादशाह है और तुम्हें भी बादशाह बना देगा।