शरद पूर्णिमा

वर्ष के बारह महीनों में शरद पूर्णिमा ऐसी पूर्णिमा है, जो तन, मन और धन तीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, और धन की देवी महालक्ष्मी रात को यह देखने के लिए निकलती हैं कि कौन जाग रहा है और अपने कर्मनिष्ठ भक्तों को धन-धान्य से भरपूर करती हैं।

कोजागरी पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा का एक नाम कोजागरी पूर्णिमा भी है, यानी लक्ष्मी जी पूछती हैं – “कौन जाग रहा है?” अश्विन महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम अश्विन पड़ा है।

चंद्रमा की विशेषताएँ

एक महीने में चंद्रमा जिन 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है, उनमें अश्विनी नक्षत्र सबसे पहला है, और इसकी पूर्णिमा आरोग्य देती है। केवल शरद पूर्णिमा को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे ज्यादा निकट होता है। चंद्रमा की किरणों से इस दिन अमृत बरसता है।

आयुर्वेद और शरद पूर्णिमा

आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस पूर्णिमा की प्रतीक्षा करते हैं। जीवनदायिनी रोगनाशक जड़ी-बूटियों को शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखा जाता है। अमृत से नहाई इन जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयाँ रोगी पर तुरंत असर करती हैं।

चंद्रमा और मन

चंद्रमा को वेद-पुराणों में मन के समान माना गया है – चंद्रमा मनसो जातः। वायु पुराण में चंद्रमा को जल का कारक बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को औषधीश यानी औषधियों का स्वामी कहा गया है।

शरद पूर्णिमा की खीर

शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में रखी खीर खाने से शरीर के सभी रोग दूर होते हैं। ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, और भाद्रपद मास में शरीर में पित्त का संचय हो जाता है, जो शरद पूर्णिमा की शीतल धवल चांदनी में रखी खीर से बाहर निकलता है।

यह खीर एक विशेष विधि से बनाई जाती है। पूरी रात चांदनी में रखने के बाद सुबह खाली पेट इसे खाने से सभी रोग दूर होते हैं, और शरीर निरोगी होता है।

रास पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण से भी यह पूर्णिमा जुड़ी है। इस रात को श्रीकृष्ण अपनी राधा रानी और अन्य सखियों के साथ महारास रचाते हैं। कहते हैं, जब वृन्दावन में भगवान कृष्ण महारास रचा रहे थे तो चंद्रमा आसमान से सब देख रहा था और वह इतना भाव-विभोर हुआ कि उसने अपनी शीतलता के साथ पृथ्वी पर अमृत की वर्षा आरंभ कर दी।

उत्सव और परंपराएँ

गुजरात में शरद पूर्णिमा को लोग रास रचाते हैं और गरबा खेलते हैं। मणिपुर में भी श्रीकृष्ण भक्त रास रचाते हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में शरद पूर्णिमा की रात को महालक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूर्णिमा को जो महालक्ष्मी का पूजन करते हैं और रात भर जागते हैं, उनकी सभी कामनाएँ पूरी होती हैं।

कुमार पूर्णिमा

ओडिशा में शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। आदिदेव महादेव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म इसी पूर्णिमा को हुआ था। गौर वर्ण, आकर्षक, सुंदर कार्तिकेय की पूजा कुंवारी लड़कियां उनके जैसा पति पाने के लिए करती हैं।

ऋतु परिवर्तन और कार्तिक स्नान

शरद पूर्णिमा ऐसे महीने में आती है जब वर्षा ऋतु अंतिम समय पर होती है। शरद ऋतु अपने बाल्यकाल में होती है और हेमंत ऋतु आरंभ हो चुकी होती है। इसी पूर्णिमा से कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है।


शरद पूर्णिमा की महिमा अनंत है और इसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्ता अद्वितीय है। यह पूर्णिमा हमें तन, मन और धन की समृद्धि का संदेश देती है और हमें अपने जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।

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